नांदेड़ ग्रामीण पुलिस स्टेशन के 5 पुलिसकर्मियों के निलंबन की मांग, मानवाधिकार संगठन ने उठाई

 

“रक्षक या भक्षक?” नांदेड़ ग्रामीण पुलिस स्टेशन के 5 पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप

  • दो भाइयों को घर से उठाकर मारपीट करने का आरोप

  • दिव्यांग और अस्थमा पीड़ित युवक के साथ भी कथित रूप से बेरहमी

  • झूठे चोरी के मामले में फंसाने की धमकी देने का आरोप

  • मानवाधिकार सुरक्षा एवं न्याय परिषद ने आरोपी पुलिसकर्मियों के निलंबन की मांग की

  • सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट लिटिगेंट्स एसोसिएशन ने पीड़ितों को समर्थन दिया

  • पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग

  • पूरे नांदेड़ जिले में घटना को लेकर आक्रोश, सामाजिक संगठनों ने जताई नाराजगी


मानवाधिकार सुरक्षा एवं न्याय परिषद ने नांदेड़ ग्रामीण पुलिस स्टेशन में कार्यरत पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और तत्काल निलंबन की मांग की है। इन पुलिसकर्मियों पर दो भाइयों के साथ कथित रूप से अवैध मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

महाराष्ट्र राज्य अध्यक्ष मुरसलीन ए. शेख द्वारा पुलिस अधीक्षक को दी गई शिकायत के अनुसार, यह घटना 20 मई 2026 की रात लगभग 10 बजे की है। शिकायत में कहा गया है कि नांदेड़ ग्रामीण पुलिस स्टेशन के करीब पांच पुलिसकर्मी शेख मोहसिन शेख बाबू के घर पहुंचे और बिना कोई वैध कारण बताए उनके तथा उनके भाई के साथ मारपीट की और अपशब्द कहे।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि शेख सोहेल शेख बाबू शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं और अस्थमा से पीड़ित हैं। इसके बावजूद उन्हें जबरन पुलिस स्टेशन ले जाकर दोबारा मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है।

जब दोनों भाइयों ने कार्रवाई का कारण पूछा, तो आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने कहा, “हम पुलिस हैं, हम कुछ भी कर सकते हैं। तुम्हें झूठे चोरी के मामले में फंसा देंगे।”

परिवार का कहना है कि कथित चोरी की घटना के समय वे नांदेड़ में मौजूद ही नहीं थे, बल्कि यवतमाल जिले में एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे। शिकायत के अनुसार, मकान मालिक ने भी पुलिस को बताया था कि उन्हें दोनों भाइयों पर कोई संदेह नहीं है और वे उन पर भरोसा करते हैं।

यह भी आरोप लगाया गया है कि मारपीट के बाद पीड़ित इलाज के लिए एक निजी अस्पताल पहुंचे, लेकिन “यह पुलिस का मामला है” कहकर उन्हें इलाज देने से मना कर दिया गया। बाद में सरकारी अस्पताल में उनका उपचार किया गया, जहां कथित रूप से मेडिकल प्रमाणपत्र देने से भी इनकार कर दिया गया।

मानवाधिकार सुरक्षा एवं न्याय परिषद ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, आरोपी पुलिसकर्मियों के तत्काल निलंबन, दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई तथा पीड़ित परिवार को सुरक्षा और न्याय देने की मांग की है।

इस घटना के बाद पूरे नांदेड़ जिले में आक्रोश का माहौल है। कई सामाजिक और मानवाधिकार संगठनों ने इस मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।

टिप्पण्या

या ब्लॉगवरील लोकप्रिय पोस्ट

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और भारत सरकार के निर्देशानुसार कोई भी अधिकारी या डॉक्टर आपको कोरोना वैक्सीन या कोई अन्य वैक्सीन लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है

बॉम्बे हाई कोर्ट की फटकार के बाद पीछे हटी महाराष्ट्र सरकार।

सर्वोच्च न्यायालयाच्या आदेशानुसार व्हॅक्सीन घेणे कोणावरही बंधनकारक नाही